Sunday, July 27, 2008

उच्च शिक्षा और रुचि

उच्च शिक्षा का स्वरुप आज तेजी से बदल रहा है। एक ओर तो पोस्ट ग्रैजुएट और पी. एच. डी. जैसी डिग्रियों का महत्व काफी बढ़ा है । सतही ज्ञान की जगह अब हर कोइ विशेशज्ञ की तलाश में है । अतः कई नौकरियों में पोस्टग्रैजुएट्स को प्रधानता दी जाती है । यहाँ तक कि अब कुछ बी.पी.ओ. भी केवल पोस्ट ग्रैजुएट और पी. एच. डी. के साथ ही काम करतें हैं । ऎसे बी.पी.ओ. प्रायः लीगल प्रोसेस आउटसोर्सिंग, फाइनेन्सियल, भूगर्भशास्त्र या उच्च रिसर्च जैसे क्षेत्रों में काम करतें हैं । इसके अलावा शोध और पेटेन्ट्स के क्षेत्र में भी काफी प्रगति हुई है और वहाँ भी उच्च शिक्षा को ही प्रधानता दी जाती है । वहीं दूसरी ओर ज्यादातर नौकरियों में आज क्वालिफ़िकेशन से ज्यादा अनुभव को तरजीह दी जाती है । सिर्फ क्वालिफ़िकेशन के आधार पर मिलने वाली नौकरियों का जमाना अब लद चुका है । अनुभव और क्वालिफ़िकेशन में अगर तालमेल न हो तो एक्सट्रा क्वालिफ़िकेशन, डिसक्वालिफ़िकेशन की वजह भी बन जाता है । अतः सोच समझकर ही उच्च शिक्षा को अपनाना चाहिये । इधर उधर की डिग्रियाँ इकट्ठी करके समय और पैसे दोनो ही बरबाद नहीं करने चाहिये ।

उच्च शिक्षा के विषय को चुनने में अपनी रुचि का खास ध्यान रखना चाहिये । बिना रुचि के विषय में न केवल आगे बढ़ने के लिये ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है बल्कि बाद में कोई दूसरा रास्ता चुनना भी कठिन होता है । पढ़ाई के बाद मिलने वाले प्लेसमेंट पर भी विशेष ध्यान देना चाहिये । सिर्फ लेकचररशिप का विकल्प ही काफी नहीं है । रुचि के साथ-साथ उस विषय के लिये अनिवार्य एप्टिच्यूड होना भी बहुत जरुरी है । आजकल डिस्टेन्स एडुकेशन और प्राइवेट इन्सटिच्यूट की बाढ़ के कारण किसी भी विषय में दाखिला पाना आसान हो गया है । ऐसे में एप्टिच्यूड का कोई ख्याल नहीं रखा जाता है । उल्टे तरह तरह के प्रलोभन और आश्वाशन देकर सबको आकर्षित किया जाता है ।हाल के दिनों में कम्प्यूटर क्षेत्र में आयी तेजी ओर इसमें पैदा होने वाली सैकड़ों नौकरियों के लोभ में , मैथ और एप्टिच्यूड में कमजोर छात्रों ने भी भारी संख्या में इस क्षेत्र का रुख कर लिया । ऐसे लोगों को आगे चलकर काफ़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और छोटी-मोटी या डाटा एन्ट्री की नौकरी से ही सन्तोष करना पड़ा । इसी तरह से एम.बी.ए के क्रेज़ और सेल्स से दूर भागने के ख्याल से कई साइंस या आर्ट्स के छात्र भी एम.बी.ए - फिनान्स का रुख कर लेते हैं । ऐसे में छात्रों को भी आगे चलकर अकाउन्ट्स और कॉमर्स की कमी खलती है और प्लेसमेंट के समय में हमेशा वे खुद को बैकफुट पर पाते हैं । अतः बहुत ही सावधानी से उच्च शिक्षा के विषय का चुनाव करना चाहिये । लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि किसी विषय विशेष में कमज़ोर होने से सारे रास्ते बन्द हो जाते हैं । बल्कि आजकल तो साधारण से साधारण रास्ता भी सफलता की ओर ले जा सकता है । उदाहरण के लिये पहले जहाँ फ़ाइन आर्ट्स और स्पोर्ट्स को हिकारत की नज़र से देखा जाता था वहीं आज कल के सफल चित्रकार और खिलाड़ी अन्य किसी भी प्रोफेशनल से कहीं आगे हैं । हाँ, इन क्षेत्रों में सफलता का प्रतिशत कम ज़रुर है और इनमें ज्यादा लगन और मेहनत की ज़रुरत है । आज आवश्यकता है अपनी रुचि और क्षमता की सही पहचान करने की और फिर एकाग्रता और लगन से उसकी साधना करने की ।